AIIMS देवघर फेज-2: झारखंड ही नहीं, पूरे पूर्वी भारत के लिए गेमचेंजर
Deoghar | Jharkhand : देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) अब अपने दूसरे चरण के विस्तार की ओर तेजी से बढ़ रहा है। फेज-2 के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को विस्तृत प्रस्ताव भेजा जा चुका है, जिससे यह स्पष्ट है कि आने वाले वर्षों में AIIMS देवघर पूर्वी भारत का प्रमुख चिकित्सा एवं शिक्षा केंद्र बन सकता है।
क्या है AIIMS देवघर फेज-2 की बड़ी योजना?
फेज-2 विस्तार योजना में कई महत्वपूर्ण विकास कार्य शामिल हैं:
- स्क्रीनिंग OPD की स्थापना – मरीजों की प्रारंभिक जांच एक ही स्थान पर
- अकादमिक ब्लॉक का निर्माण – मेडिकल शिक्षा और रिसर्च को मजबूती
- 1500 बेड का हॉस्टल – मेडिकल, नर्सिंग और रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए
- स्टाफ क्वार्टर – डॉक्टरों व कर्मचारियों के लिए बेहतर आवास सुविधा
- DPR तैयार करने हेतु कंसल्टेंट नियुक्ति प्रक्रिया तेज
AIIMS देवघर फेज-2 से मरीजों को क्या होगा फायदा?
स्क्रीनिंग OPD शुरू होने के बाद प्रतिदिन 8 से 10 हजार मरीजों की जांच संभव हो सकती है। अभी जहां 2,000-2,500 मरीजों की जांच होती है, वहीं नई व्यवस्था से समय पर सही इलाज और बेहतर प्रबंधन संभव होगा। इससे न केवल झारखंड बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और आसपास के राज्यों के मरीजों को भी बड़ा लाभ मिलेगा।
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AIIMS देवघर फेज-2 से मेडिकल एजुकेशन को मिलेगा बूस्ट
अकादमिक ब्लॉक बनने से MBBS, नर्सिंग, पैरामेडिकल और सुपर-स्पेशियलिटी कोर्स के छात्रों को आधुनिक क्लासरूम, लेक्चर हॉल, रिसर्च सुविधाएं, बेहतर क्लिनिकल एक्सपोज़र मिलेगा, जिससे यह संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा।
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दिल्ली-भोपाल AIIMS की तर्ज पर विकास
AIIMS देवघर का फेज-2 विकास दिल्ली, भोपाल और भुवनेश्वर AIIMS मॉडल पर किया जाएगा। बड़े हॉस्टल और आवासीय परिसर इसे एक पूर्ण मेडिकल टाउनशिप का रूप देंगे। पूर्वी भारत का मेडिकल हब बनने की ओर यदि यह विस्तार योजना समय पर पूरी होती है, तो AIIMS देवघर पूर्वी भारत का प्रमुख रेफरल सेंटर, उच्चस्तरीय मेडिकल रिसर्च हब, और क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं का मजबूत आधार
बन सकता है।

