vande mataram

“वंदे मातरम्” भारत की आत्मा का मंत्र और इतिहास की अमर गूँज!

वंदे मातरम् का महत्व (OPINION) | भारत के प्रधानमंत्री माननीय नरेंद्र मोदी जी ने संसद में स्पष्ट शब्दों में कहा कि “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, यह भारत की आत्मा का मंत्र है।” उनकी यह बात केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक सत्य का उद्घोष है।

वंदे मातरम् का इतिहास कई कड़वी सच्चाइयों से भी भरा

वंदे मातरम्, जिसने भारत के स्वतंत्रता संग्राम में लाखों क्रांतिकारियों की नसों में तप्त लहू भर दिया था, उसके साथ बीते सौ वर्षों का इतिहास कई कड़वी सच्चाइयों से भी भरा है। जब वंदे मातरम् बदला, तब देश भी बदल रहा था। वंदे मातरम् के 50 वर्ष हुए तब भारत गुलामी की बेड़ियों में कराह रहा था।

वंदे मातरम् का सच: आज़ादी, संघर्ष और लोकतंत्र का अमर मंत्र

वंदे मातरम् के 100 वर्ष हुए, तब देश आपातकाल की कठोर जंजीरों में जकड़ा था, अभिव्यक्ति की आज़ादी दम तोड़ रही थी। इतिहास का वह काला कालखंड, जब इस पावन मंत्र के सर्वोत्तम उत्सव का समय था, उसी दौरान लोकतंत्र का गला घोंट दिया गया।

वंदे मातरम् मातृभूमि का शाश्वत आवाहन

देशभक्ति के लिए जीने-मरने वाले लोगों को जेल में ठूंस दिया गया, आवाज उठाने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। यह विडंबना ही थी कि जिस गीत ने देश को आज़ादी दिलाई, वही गीत अपनी ही धरती पर संदेह और प्रतिबंधों का पात्र बना दिया गया। वंदे मातरम् मातृभूमि का शाश्वत आवाहन है।

वंदे मातरम् समर्पण और श्रद्धा का सबसे पावन उच्चारण

“वंदे मातरम्” सिर्फ दो शब्द नहीं, बल्कि यह भारत की संस्कृति, सभ्यता और सामूहिक चेतना का अनंत स्त्रोत है। यह हमारे आत्मा को स्पर्श करने वाला मंत्र है, जो भारत माता की गोद में पलने वाली हर संतान को गौरव तथा बल प्रदान करता है। भारत माता हमारी जननी है और वंदे मातरम् उस जननी के प्रति समर्पण और श्रद्धा का सबसे पावन उच्चारण है।

वंदे मातरम् को लेकर नेहरू जी भी थे असहज

इतिहास के पन्ने बताते हैं कि नेहरू जी वंदे मातरम् को लेकर असहज थे। उनका मानना था कि यह आधुनिक भारत और आधुनिक राष्ट्रीयता के विचारों से मेल नहीं खाता। तुष्टिकरण की राजनीति के कारण वे खुद इस बात को लेकर चिंतित थे कि वंदे मातरम् को अपनाया जाए या नहीं।

वंदे मातरम् संपादकीय बहस नहीं, बल्कि भारत की आत्मा

लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी राष्ट्र की आत्मा का मंत्र “आधुनिक” या “पुराना” होता है? क्या देशभक्ति कभी पुरानी पड़ सकती है? जबाव है..नहीं! वंदे मातरम् तो वह शक्ति है जिसने न जाने कितने क्रांतिकारियों को हँसते-हँसते फाँसी पर चढ़ने का साहस दिया। यह किसी संपादकीय बहस का विषय नहीं, बल्कि यह भारत की आत्मा है।

हर पीढ़ी में नया जोश भरने वाला अमर मंत्र है वंदे मातरम्

वंदे मातरम् अनंत, अक्षय और अजेय है। वंदे मातरम् न समय से बंधा है और न राजनीति से। यह तो वह अखंड स्वर है जो सदियों से हमारी मिट्टी में गूँजता आया है। यह अनंत है, अक्षय है और हर पीढ़ी में नया जोश भरने वाला अमर मंत्र है।

“वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, यह भारत माता की वंदना है

आज जब भारत विश्वमंच पर नई ऊँचाइयाँ छू रहा है, तब वंदे मातरम् का जयघोष और भी बुलंद होना चाहिए। हमें याद रखना होगा कि जिस गीत ने आज़ादी दिलाई, वही गीत हमें राष्ट्र निर्माण की ऊर्जा भी देता है। “वंदे मातरम्” केवल एक गीत नहीं, यह भारत माता की वंदना है। यह उन वीरों की स्मृति है जिन्होंने देश के लिए सर्वस्व निछावर कर दिया।

“वंदे मातरम्” को पहुँचाएँ नई पीढ़ी तक

यह हमारे गर्व, हमारी अस्मिता और हमारी राष्ट्रीय चेतना का अमिट प्रतीक है। आज हम सबकी जिम्मेदारी है कि इस मंत्र के प्रति आदर, गौरव और निष्ठा को नई पीढ़ी तक पहुँचाएँ, ताकि हर भारतवासी गर्व से कह सके…वंदे मातरम्! भारत माता की जय!

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