मोदी की पाकिस्तान नीति पर कांग्रेस की बौखलाहट: डर क्या है?
लगता है जैसे कांग्रेसियों के पास कोई ‘ऑन-ऑफ’ बटन है, मोदी गोली चलाएं तो ‘हिटलर’ बना देते हैं, और बातचीत करें तो ‘कायर’! उधर पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक के बाद वही मोदी अचानक इनके लिए “बनिया”, “डरपोक”, “पराजित” और “कूटनीति में फेल” हो जाते हैं।
धुंधले चश्मे में कांग्रेस लॉबी ने मारा यू-टर्न
यानी जब भारत ने पाकिस्तान को घुसकर मारा, तो कांग्रेस का चश्मा धुंधला हो गया। जो प्रधानमंत्री आतंकियों के ठिकानों पर नौ बार हमला करवाता है, वही अचानक इनके लिए ‘गिड़गिड़ाने वाला’ बन जाता है! इतना ‘यू-टर्न’ तो बैंगलोर की ट्रैफिक भी नहीं लेती!
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मोदी ने पाकिस्तान को घुसकर मारा, फिर भी कांग्रेसी क्यों तिलमिला रहे हैं?
अब जब सीजफायर होता है जो कि कूटनीति की एक स्वाभाविक प्रक्रिया होती है, तो फिर चिल्लाना शुरू: “मोदी हार गए” और इंदिरा गांधी का नाम घसीट लाते हैं – वही इंदिरा गांधी जो 1971 में बांग्लादेश बनवा कर खुद को अपने ही लुटियंस से ‘आयरन लेडी’ घोषित करवा चुकी थीं, लेकिन पाकिस्तान से एक इंच जमीन न ले सकीं। वही बांग्लादेश आज घुसपैठ और आतंक की फैक्ट्री बन चुका है।
भैया, तय कर लो – मोदी युद्ध करें तो ग़लत, शांति करें तो भी ग़लत। या फिर सच ये है कि मोदी करें कुछ भी, तुम्हारे पेट में मरोड़ उठना तय है?
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Modi की पाकिस्तान नीति पर क्यों जल-भुन रहे हैं कांग्रेस नेता?
सच्चाई यही है: नरेन्द्र मोदी न तो कांग्रेस की तरह चुनावी कूटनीति करते हैं, और न ही टीवी कैमरों के सामने देश बेचते हैं। मोदी की रणनीति लंबी है, और नजरें सिर्फ पाकिस्तान को झुकाने पर नहीं, उसे सबक सिखाने पर हैं – स्थायी इलाज की ओर।
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जब मोदी ने मारा ‘सर्जिकल वार’, तो कांग्रेस को लगी मिर्ची
तो भाइयो और बहनो, ‘गांधी टोपी’ पहने इन रणनीति विशेषज्ञों से निवेदन है: अगली बार मोदी कुछ करें, तो पहले अपना रिमोट कंट्रोल सेट कर लेना। कहीं ऐसा न हो कि फिर से “जय जय” करते-करते अगले पल “हाय हाय” करने लगो!
संपादक: नवनीत आनंद — भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता, संघ विचारधारा समर्थक

